कविता - कहानी बचपन की
कहानी बचपन की बचपन क त अजब कहानी, हम ही राजा हम ही रानी, बीच दुवारे दिन भर खेली, आनी-पानी गो-गो रानी, होत सबेरे खेलई जाई, भरी दुपहरी वापस आयी , पापा क जब गाली खायी , कौनउ रंगे तब नहायी, बाबू त दिन भर डांटइ , औ संगे दुई कंटाप लगावइ, चाचा त सीधइ मोहें से , बातउ तक न कभउ करई , बीच दुवारे बड़का भइया, मन लगाइ के गरियावइ, ताना देयी में हमरी भौजी, रहिन मंथरा क माई, ओनके देख के गांव हमार, पूजई लागइ बरम गोसाई । भौजी क हमरें गजब कहानी , होत सबेरे भवानी आवइ , सबसे पहिले श्रृंगार करइ, फिर जाई के बात करइ, करियहवा बर्तन जैसा , मोह ओनकर जब देख लिहिन , सांपे के केचुर जैसन , झोटी आपन बिखेर लिहिन , नागिन जैसन रूप सुन्दरी , देखे के बाद त कांप गवा, के कहई चाय औ पानी , पेटे क पानी सुख गवां, दाना-पानी सब छोड़ि-छाड़ के, साष्टांग प्रणाम करइ लागे, देखतइ गुस्सा ओनकर हम, जान छोड़ाई के सीधइ भागे, कौआ जैसन मधुर राग से , जी भर के आशीष दिहिन, सास-ससुर औ बबुआ पर , अमृत वर्षा करवाए दिहिन । भौजी के एक भैया , भौजी से त बीस रहे , जब देख घरवै हमरै , बीसन हफ्ता टिक...