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कथा और कथानक

कथा और कथानक कथा एवं कथानक दोनो ही शब्द संस्कृत के कथ धातु से बने हुए है । कथा का मतलब होता है महात्म्य या कोई कहानी लेकिन हमारे धर्म में कथा का सबसे प्रचलित रूप है किसी ईश्वरीय गाथा को पूर्ण मनोयोग एवं विधि-विधान के साथ सुनना । कथानक का अर्थ है किसी रचना की आदि से अंत तक की सब बातों का सामूहिक रूप । आइए आज हम इस पर विस्तृत रूप से चर्चा करते है।           आज से कुछ समय पहले मेरे यहां भगवान श्री सत्यनारायण कथा का आयोजन हुआ । प्रायः यह देखा गया है कि कथा का आयोजन दिन के मध्य अर्थात् दोपहर के समय ही किया जाता है जिससे कि सभी व्यक्ति अपने कार्यों को पूर्ण करके यथा समय कथा को सुनने के लिए एकत्रित हो सकें और भगवान की कथा का रसास्वादन कर सकें । सभी व्यक्ति एकत्रित तो कथा सुनने के लिए होते है लेकिन उनकी चर्चा कथा से दूर हटकर कथानक का स्वरूप ले लेती है ।           दोपहर के समय बारी-बारी से गांव की महिलाएं और प्रत्येक घर से व्यक्ति अब मेरे दरवाजे पर आने लगे थे कथा सुनने के लिए । एक घन्टे के अन्दर...