Posts

Showing posts with the label बेटी पर कविता

मेरी प्यारी बेटी

Image
मेरी प्यारी बेटी अपने माता के कोख से, जन्म जब लेती, अपनी किलकारियों की गूंज से, मेरे घर के सूने आंगन में, खुशिया भर देती, मेरी प्यारी सी बेटी । मेरे हाथों को जब भी, अपने नाजूक हाथों से छूती, मेरी गोदी में आकर, एकटक नजर से , मुझे बार-बार घुरती, मेरी छोटी सी बेटी । अभी कल की तो बात है, मैं स्वयं एक बच्चा था, पर आज मेरी गुड़िया ने, खींच दी लकीर, कल तक मैं जहां था, उसी ही जगह पर, आज खड़ी मेरी बेटी । मुझे देखते ही वो, जी भर के खूब रोती, गिरते है उसके आंखों से आंसुओं के मोती, लिपटती वों मुझसे, लताएं जैसे बेल से, समेटता मैं उसको, अपने कंधे के मेल से, पहचानती वो मुझको , न जाने किस तकनीक से, लगते ही गले मेरे , मुस्कान वो बिखेरती, टक-टकी निगाहों से, मेरे भाव को पहचानती, उसके कोमल कपोल पर, गुदगुदी को मै करता, क्षण भर में ही खुशी से, सिमटती वो मुझमें, एहसास भी पिता का, कराती थी बेटी । सामने मेरी बेटी, जब दिखाई न देती, मुझे उसकी आवाज, सुनाई न देती, खिलौने भी उसके, जब दिखते अकेले, ढुंढता ...